कहानी -
विश्राम पर नींद
राजनारायण बोहरे
कू ssssssss!
ट्रेन के इन पॉवरजिन ने लम्बी सिटी बजाई तो यात्री अपने डिब्बों में सीमेन्टने लगे।
क्लासिक ईयर का डुबला-पटला विक्कू ' डाउन ट्रेन ' लेकर वापस आने को तैयार है। नई दिल्ली स्टेशन के मोटरसाइकिल नंबर 1 पर चलने को तैयार स्टेक ट्रेन में ही चिंता है। चिंता पैदा कर दी है चन्नी सेठ ने। इन्ही कम्पार्टमेंट की रैक किराए पर आई गाड़ी ' अप ट्रेन ' के रूप में घंटे भर पहले नई दिल्ली स्टेशन के समान लॉज पर विक्रेता लगी थी, तो बेड-रॉल के सामान से निकाले कर विक्कू ने गन्दे हो गया चराचर , तकिया कव्हर और उल्टी-दस्त से सने सत्तर कम्बल, चन्नी सेठ को सोम्पते समय साफ कह दिया था, 'मुझे सत्तर कम्बल दो! अब मेरे पास केवल तीन कम्बल बचे हैं , और आप जानते हैं कि तीन सौ सत्तर सत्तर
का बेड-राउल किराया मेरा स्वीकृत
है , इसलिए आज सवारियों को सत्तर कम्बल कम मिलेंगे। '
चन्नी सेठ बोले थे ,' तो देना न! '
' मैं कहां से कंबल बोलती हूं ? गाइन चॉइस थ्री सत्तर कम्बल ही तो स्टॉक में थे ए. सी. तीन
में. यहां आपको नीचे दिए गए सत्तर कंबल धोने के वास्ते के बारे में बताया गया है।
' तो फिर कोई
सवारी कम्बले मॅई तब टाल जाना। '
' इस ठंड के मौसम में बिन कंबल के सवारियों की रात कैसे कटेगी ? भाई साहब उन लोगों ने टिकट के साथ पूरे बेडरोल के लिए रेलवे को भी पैसे दिए हैं। '
अस्सिटेंट ने उसे बताया कि ' तुम्हें इतनी चिंता हो रही है कि इस गाड़ी का मालिक भी तुम ही हो और इन सवारियों का सारा एस्टोरेटेड स्टोर है। अरे तू एक बहुत छोटा सा स्टाफ है पागल। मज़दूर है। '
झुंझलाके विक्कू बोला था ,' बल्कि मजदूर से भी छोटा! मैं तो होटल के वेटर से भी गुज़रा हूँ। '
' वह कह रहा हूं मैं।' जिम्मेदारी तब तक है , जब तक ट्रेन दौड़
रही है। ट्रेन अपने गंतव्य पर आरंभिक टर्मिनेट हुई और तेरी ड्यूटी समाप्त हो गई! '
विक्कू ने कहा , ' ऐसा तो ट्रेन ड्राइवर , कोच स्टेडियम और ट्रेन मैनेजर यानी गार्ड के साथ भी होता है।' मुझे तो फिर भी इस ट्रेन के सफर में अट्ठाईस-बीस घंटे का समय लगता है।
जबकि इन रेलवे के कर्मचारियों की तो छह सात घंटे के बाद ही ड्यूटी खत्म हो जाती है. लेकिन सेठ जी की बात कहीं रुकी है कि सत्तर कमबल देना जरूरी है। '
प्रिंसिपल ने झुंझला के कहा , ' आज तो दूसरी स्टोरी में एक्स्ट्रा कम्बल रख दिए, तो तुमको दे मेरे एक पास भी कम्बल नहीं हैं। अब तू ही है किसी प्रकार का ढांचा। '
तब से विक्कू बहुत ताकतवर है। उसे समझ नहीं आ रहा है कि किस यात्री को क्या जवाब देना है ? ए.सी. उनका कार्यभार तीन के पाँचवें नंबर पर है। उसका तो ऐसा कोई दोस्त भी नहीं है कि वह सत्तर कंबल किसी से मांग ले और गाड़ी का काम चलाये। आज कैसे रात गुजरेगी ? और गंतव्य पर कैसे पहुंचें ? वह इसी में चिंतित है।
ए.सी. तू
के भी दो रईस और ए.सी. फर्स्ट का भी एक डिब्बा इस गाड़ी में लगा है। कुल मिलाकर एक सौ अटेंडेंट बर्थ का चार्ज एक अन्य कोच अटेंडेंट दीनू के पास है , शायद उसके पास कुछ अतिरिक्त कंबल हो सकते हैं।
विक्कू उठा और दीनू के पास चला आया। देखा, दीनू भाव से अपना बर्थ वीडियो लेटा हुआ मोबाइल में चला गया था।
विक्कू खड़ा हो गया , उसने देखा कि दीनू को आस-पास कोई खबर नहीं है , न ही बगल के प्लेटफॉर्म पर वाटर-वाटर के पावर इंजन की , न हॉर्न स्कूटर की , न आने वाली गाड़ियों के बारे में कम्यूटर की महिला की आवाज में
बार-बार सूचना दी गई थी । उसने मोबाइल तक मोबाइल के जाल में खोया है।
जब से मोबाइल आया है, युवा पीढ़ी ही नहीं छोटे बच्चे और बच्चे भी मोबाइल के रास्ते अपनी-अपनी तरफ बुलाते हैं गुप्त दुनिया में विचार करते रहते हैं। छोटा सा बटन नोटबुक और आपके सामने खुली एक सुहाना माया मोहवी दुनिया! अन्य सुरैंग्स में नामांकित अनूठे दस्तावेज़ तथ्य आपके सामने आने शुरू हो जाते हैं। इस अजूबे-अनजाने दुनिया में कुछ ऐसी गुफाएं हैं जो अब तक समाज में बताई गई हैं , इस मोबाइल पर उन तक पहुंचने का सरल रास्ता बताया गया है। उन सभी किशोर बच्चों के लिए भी जो अभी स्त्रीपुरुषों को आकर्षित करते हैं और दबे आकर्षक स्त्री के शरीर की जादुई कल्पना करते हैं। उन बुजुर्गों के लिए भी जो अपनी युवावस्था में थे तो किराना व सब्जीभाजी लेकर आए , नौकरी की और देर रात पत्नी से मिल में ही जीवन गुजार लिया।
अब इस दुनिया को देखो वे इस चमत्कार को , सपनीली और कुतूहल भरी दुनिया में अपना जीवन संघर्ष करने की कल्पना करते हैं और बार-बार पछताते हैं - हे राम हम यह सब पहले क्यों नहीं जानते! क्यों नहीं देखा! क्यों नहीं किया !
विक्कू को पता चला कि गाड़ी वाली गाड़ियां ही वाली हैं और अब कुछ देर में ही सवारियां एक-एक कर उसे बेड-रॉल क्लास लगेंगी!
दीनू के बर्थ के पीछे बनी कंबल को उझक कर देखा , तो पाया , वहां कुल मिलाकर छह बड़े थैले के कंबलों से अलग-अलग रखे गए हैं , जिसमें उसका अनुमान है कि एक परत में एक चप्पल का कंबल बना हुआ है तो वह इस तरह ही दीनू के पास भी है। उनके पास एक्स्ट्रा एक कम्बल भी नहीं है। यहां तक कि अगर वह साड़ी सवारियां चढ़ती तो खुद को भी कम्बल नहीं मिलने वाला।
निराश विक्कू बिना दीनू को डिस्टर्ब कीसे अपने कंपार्टमेंट में लौटा आया।
उन्होंने ए.सी.थ्री के बी 2 कोच को अपना प्लांटर प्लांट बनाया है। वहां उसने अपनी बर्थ केल्स और बड़ी सूनी सी इंटरेक्शन से बर्थ के पीछे बने लकड़ी के बॉक्स को देखने लगा , जिसमें कम्बल और ढोले चर्डों के निशान लगे हुए थे।
उसे लगा कि कोल चक्र तो हर बर्थ तक पहुंचा दिया जाता है , जिससे सवारियों को धैर्यवान साथीगा मिल जाता है। बड़े उत्साह से दसियों की संख्या के अंदर निकल गए। जो-जो सवारियां आलेवाली थीं , नमस्ते करते हुए उन्होंने दो-दो चाडों का एक-एक हाथी पकड़ाया और हाथ के पूरे होते ही अन्य लोगों के साथ अपनी-अपनी दोस्ती जुटा ली।
लगभग एक घंटे में , जब गाड़ी अपनी ओर से रवाना हुई तो वह लगभग हर बर्थ पर लगभग हर बर्थ तक पहुँच चुकी थी । उसने देखा कि कुल मिला कर लगभग पेंड्राह तकियों के कव्हर में छोटे-छोटे गिलास हो गए थे , उस पर वह अपने पास से धुले हुए कव्हर लेकर फुर्ती से नीचे चला गया। यूँ तो उसके पास की संख्या में सफेद, चमकीले, ढके हुए सौतेले कपड़े भी रखे हैं , पर उसने अपने कांटे खोले ही नहीं। क्योंकि बहुत कम ही जिद्दी सवारियां उनसे नाखुश भी मांगती हैं और बहुत ना नुकुर करने के बाद उन्हें जबरदस्ती में दे देती हैं ,
लेकिन इस वक्त उन्होंने किसी को तो नहीं लिया। असली इन उपकरणों पर रेलवे का आइकॉन नहीं बना है तो जाते समय दस-पांच यात्री अपनी अटैची में धराके उतर जाते हैं , जबकि चंद्र व तकिया कवर के चारों ओर की सीमा पट्टियों में बा कहा आईआर या एनसीआर या डब्ल्यूआर के कलाकार अक्षर भारतीय रेलवे के जॉन
की पहचान बने हुए हैं। जो इफ़ेक्ट के वक्त ही उकेर दिए गए हैं।और कम्बल के चार रिश्तेदार भी भारतीय रेलवे के प्रतीक अक्षर रेशमी गेज से पतले रहते हैं , इसलिए ऐसे बड़े कपड़े कोई घर नहीं ले जाता।
सहसा
विक्कू ने अनुभव किया कि उनके बर्थ के सामने वाले इंडियन स्टाइल के कट्टर में से थोड़ा-थोड़ा पानी बाहर बह रहा है। विक्कू बर्थ से उतरा और एक साधक का दरवाजा खुला। उसने देखा कि शैतान की फ्लैश में से पानी लगातार निकल रहा है, उसी पानी से तालाब में पानी भरता जा रहा है। पहले तो उसने सोचा कि श्रीकांत की समस्या ठीक करना तो सफाई की जिम्मेदारी है, इस रेलवे में सफाई की देखभाल अलग हो गई है , उनके कर्मचारियों का नल बंद हो गया और फिर अख्तर में भर गया पानी और गंदगी की सफाई । लेकिन फिर उसने यही सोचा तो उसे भी परेशानी हो रही है क्योंकि उसका बर्थ सामने है तो उसे भी परेशानी हो रही है। तो उसने झटका कर फ्लैश बंद करने की कोशिश की। फ्लश का हैंडल कहीं फंस गया था इसलिए
उसका पानी बंद नहीं हुआ था , इसलिए वह निराश होकर अपनी बर्थ पर बैठ गई। बाहर पानी छलक रहा था , तेजी से अचानक दो सवारियाँ निकलीं तो छप छप ने पानी मचा दिया, कुछ चिल्लाते हुए उछले। उसे ऐसा महसूस हुआ कि ए.सी. रेलवे के यात्रियों में जाने क्या-क्या बीमारी होती है कि कभी-कभी अपनी जगह पर एक घंटा भी नहीं रुकते। पैदल चलने का सफर क्यों न हो , अपनी सीट से घूमकर दूसरी कंपार्टमेंट में जाना-आना , अकेले ही घूमने के चक्कर में सवारियों की आदत हो गई है।
पानी में डूबे दोनों के बीच
की गैलरी में स्टिक ने करीब-करीब देखा चालीसेक वर्ष का व्यक्ति उसे डांटते
बोला
, ' रे क्यों कर रहा है ?' देख नहीं रहा है कलाकार में पानी भर गया है और गैलरी में फ़ेल हो रहा है , पेस्ट फ़ेल हो रहा है! '
विक्कू
की इच्छा थी कि जवाब में वह कुछ तीखा बोल जाए , पर न तो उसकी इच्छा है , न उसकी नौकरी के ऐसे एटिकेट हैं! वह किसी भी यात्री को नाराज़ नहीं कर सकता। उन्होंने बहुत ही सम्मान के साथ कहा , ' बाबूजी मैं सफाई कर्मचारी नहीं हूं और यह काम मेरा नहीं है। मैं केवल कोच अटेनडेंट हूं! '
' वह कहां है ?'
' बाबूजी मुझे पता नहीं है मैं तो सिर्फ बेड रॉल देने वाला हूं। मैं यहां पूछता हूं , आपको मेरी सेवाओं की आवश्यकता हो तो बताएं! '
' अच्छा ला ढोला हुआ साफ कंबल दे मुझे। '
' आपको कितने नंबर पर मैं वह स्मारक देता हूं। '
' 16 और 17 ' कहानी में वह व्यक्ति चला गया तो विक्कू दो कंबल उठाकर
16 व 17 नंबर की बर्थ पर पहुंच गया और वहां पत्नी के साथ बैठा उन्ही सज्जन को कंबल देने के लिए फिर से वह अपनी तरफ झुक गया।
इच्छा हो रही थी कि मोबाइल निकले और वह भी उसे दुनिया में थोड़ा सा तैर ले जिसमें कि दीनू अभी भी तैर रहा है। लेकिन उसे बार-बार क्या डर लग रहा है कि सत्तर सवारियों को वह कहां से मिलेगा ?
उसने एक बार और अपने गंतव्य वाले अंडा मन्नी को फोन किया , देर रात तक घंटी के बाद उसने फोन किया ' हेलो!' '
' भाई साहब नमस्कार! हम विक्कू बोल रहे हैं। '
' हां बोलो विक्कू! गाड़ी निकली दिल्ली से ?'
' हां बाबूजी निकल ली।' लेकिन आज एक समस्या है. आज गंतव्य तक पहुंचने में क्या-क्या झगड़ों का सामना करना चाहिए ?'
' क्यों ऐसा हुआ ?'
' मेरे पास तीन सौ सत्तर सवारियाँ हैं और कम्बले केवल सौ तीन हैं! '
' अरे तूने चन्नी से बाकी के कंबल क्यों नहीं मांगे ?'
' मैंने कहा था तो बाबूजी ने मुझसे कहा था और मुझसे कहा था कि जान! '
' अरे एक मिनट रुको मैं उनसे बात करता हूं। '
' हां बाबूजी जल्दी करो! 'हर सवारी गाड़ी कम्बल मांग रही है , मैं कहां से हूं ?'
' ठीक है मैं कोशिश करता हूं कि रास्ते के किसी भी स्टेशन से कुछ कमबल मिल जाए। '
विक्कू
को आशा हुई कि ' चलने को लेकर चिंता है वह कुछ न कुछ कर ही देगा। '
लगभग दस
मिनट ही लक्ष्य होगा कि पांच-सात सवारियों ने फिर सिर पर इशारा किया , ' हमको कंबल दो भाई!' '
' जी बाबू जी, आप कितने नंबर पर हैं ?'
उनके बताए बर्थ नंबर की जांच कर विक्कू ने उन्हें अन्यत्र कंबेल दे दिया।
फिर तो कम्बल दिग्गजों की लाइन ही लग गई। जिसका मन हो वह आ कर कंबल मांग रहा था।
विक्कू को अचानक एक विचार सूझा कि ऐसे में अगर ए.सी. मेंटेनर आ जाए और वह पांचों कोच के ए सी का टेंपरेचर बढ़ा कर 24 करवा देगा
तो किसी को ठंड ना पढ़ाई और कोई कंबल ना मांगेगा।
लेकिन एसी का मेंटेनर कहीं नहीं था। विक्कू ने एक चक्कर फिर से ऐस टू और फर्स्ट की तरफ लगाया कि शायद ऐस मेंटेनर वहाँ डूबे हों। परन्तु वह वहाँ भी न था।
उसने दीनू से पूछा '
दीनू , एसी मेंटेनर कहां है ? मुझसे मेरे कोच में टेम्परेचर बढ़ना है। '
' बढ़वाना तो मुझे भी है, लेकिन आज ट्रेन में वह वहीं है! या तो उसकी ट्रेन छूट गई या फिर वह ओवरटाइम चला गया और उसे राहत नहीं मिली तो ट्रॉली में बैठकर ट्रेन से उतर गया। '
' अरे वह तो उतर गया, परन्तु मुझ पर बहुत संकट आ गया! '
' क्या परेशानी है ?
' अरे, मेरी तीन सत्तर सवारियों के लिए मुझे केवल सौ तीन सौ कंबल मिलेंगे, अब क्या होगा ?'
' अरे, तो मुझे छन्नी भैया ने सिखाया नहीं क्या ?
' मैं चन्नी को बात गलता और मन्नी भैया को भी फोन कर दिया है। वह कह रहे हैं कि वे चन्नी से बात करते हैं और रास्ते में किसी जंक्शन से कम्बाइन का प्रयास करते हैं। '
' रास्ते में कहाँ ?'
' देखिए अब गाड़ी मथुरा मथुरा वाली है , मथुरा में तो कमरा रहता नहीं है, आगरा बड़ा जंक्शन है , शायद वहां कोई उनका परिचित निकल आया हो। '
' ठीक है अच्छी बात है! देखिये भगवान करे ऐसा ही हो। नहीं तो क्या होगा ?'
' मैं नहीं जानता। ' कहते हुए कंधे उचकाए विक्कू ने दीनू की बात से तो उसे बहुत डर लग गया।
' अब जो भगवान की कृपा! मथुरा आ रहा है , मैं मित्रों से प्रार्थना करता हूं कि वे इस संकट को हर लें! ' वह
अपनी जन्मतिथि की ओर लौट गया।
रास्ते में एक शख्स ने उनसे टोका , ' ये ऐस कम क्यों रखा है '
विक्कू ने कहा , ' साहब मैं भी परेशान हूं, ऐसा नहीं हूं!' मैं तो बेड राॅल देता हूं। '
' तो बिस्तर राउल दो। ऐसा भी काम कर रखा है। ठंड भी है कम्पार्टमेंट में और कंबल भी नहीं दे रहे हो। '
' जी मैं बेड रॉल तो नीचे दिए गए कंबले ला रहा हूं। '
वह कम्बल लेने के लिए आगे बढ़ा तो पीछे से उसने निर्देश दिया, ' अच्छा कम्बल चाहिए! '
विक्कू
कंबल लेने के लिए जब अपनी सीट पर पहुंचे तो चौंक गए। उसने देखा कि केवल चार कंबल बाकी हैं। अरे , वह तो छह चला गया था! मान लीजिए किसी सवारी को अपने हाथ से ही कम्बल उठाकर ले जाया गया।
उन्होंने चार कम्बल उठाये
और उस व्यक्ति को बुलाते हुए कहा , ' बबुजी दो कम्बल मैं झील देता हूं , कोई दो कम्बल डबल ले गया है। '
' तोफ़े पास तो गाड़ी से ज़्यादा कम्बल होते हैं ना। '
विक्कू
मोही भारी एकजुटता में बोला , ' नहीं बाबूजी हमारे पास तो कुछ बर्थ खाली होने के कारण दस फीसदी कम ही होते हैं। '
वह अपनी बर्थ की तरफ बढ़ ही रहा था कि बर्थ
नंबर एक पर लेटे सज्जन ने उसे टोका
, ' क्यों भाई इस कंपार्टमेंट में कचरा कौन सा दिखेगा ? '
वह रुका और मुस्कुरा कर बोला , ' बाबूजी मैं सफाई कर्मचारी नहीं हूं। सफ़ाई वाला आये तो वह सफ़ाई चाहता है। '
' वह कहां है ?'
' बाबूजी मेरे पास नहीं है। मुझे नहीं पता कि वह कहां है ?'
' मैं आप लोगों से प्रार्थना करता हूं। '
' हां आप साफ-सफाई का कंप्लांट कर सकते हैं फोन नंबर 139 पर! '
' और इसका भी कि आखिर में पानी भरा है। ' दो नंबर बर्थ की सवारी एक महिला थी वह बोला।
' हां बहन जी मैंने भी पानी भरा
देखा था तो मैंने फ्लैश बंद करने की कोशिश की थी। फ़्लैश बंद नहीं हुई. पानी लगातार फेल रहा है। आप भी कंप्लीट करिए। '
बर्थ
नंबर एक पर एक बुजुर्ग बोला , ' न कर्मचारी सफाई है , न ऐसे मेंटेन करने वाला है , सरकार ने जब से अपने कर्मचारी को मंजूरी दी है , हम ऐसी ही समस्या का सामना कर रहे हैं। '
रेलवे की सारी कंपनियों के लिए जैसे विक्कू ही कोई गुनहगार था ,
सभी लोग उसे ऐसे ही बताते रहे थे। उन्होंने कहा कि सब सवारियों को देखा और सिर झुकाए यात्रियों का सोचा था कि सहसा। एक वाक्य सुना जो उन्हें कुछ अच्छा लगा। उन्हें लगा कि किसी ने उनके अच्छे व्यवहार के लिए पुरस्कार दिया है। बर्थ नंबर तीन की सवारी वाला बुजुर्ग व्यक्ति कह
रहा था , ' अरे भैया, वह तो भगवान को धन्यवाद देता है कि यह लड़का स्टूडियो से कर रहा है। अन्यथा यह छोटे कर्मचारी का मतलब है टेनेंस वाले और सफाई वाले ऐसे गुंडई तरीके से बातचीत करते हैं कि हमें न तो सही जवाब मिलता है और न ही इन लोगों से बात करने की इच्छा होती है। युवाओं की तो कई बार तो ट्रेनिंग और उठापटक भी होती है! '
अपनी बर्थ पर ग्यान विक्कू ने फिर से मन्नी भैया को फोन किया। ताज्जुब था कि पहली बार एक रिंग में फोन उठाने वाले टिंकू भैया का फोन स्विच ऑफ आ रहा था। उसने वापस चन्नी भैया को सुझाव दिया कि उसे पता चले कि मन्नी भैया का फोन बंद क्यों है या उन्होंने आगरा स्टेशन पर कोलमों का चयन किया या नहीं! चन्नी भैया का भी फोन बंद था।
अब आगरा
केवल तीस किलोमीटर रह गया था।
विक्कू को लगा कि वह किसी चक्रव्यूह में फंसता
जा रहा है। अब कम्बल न पर वह
कोई क्या उत्तर देगा ? क्या वह भी तीन नंबर बर्थ
वाले बाबा के कहे अनुसार बदतमीज स्टाफ का रूप रख ले ? गिले लगे
? शराब पी ले में कौन सा किरदार निभाने लगे ? या अपनी जगह कहाँ और कहाँ बैठा ?
नहीं भाई ऐसा नहीं कर सकते! पहला विकल्प ठीक नहीं है, क्योंकि उसे शामिल किया गया है। गुंडे के रूप में बातचीत करना उसकी मां से नहीं सीखा है , और उसके घर की स्थिति भी नहीं है कि वह गुंडे के तरीके से बात करे। शराब का नाटक करना चाहेगा तो डर यह भी है कि हर ऐरा-गैरा और सारी सवारियां मिलकर उसे ठोंक देवी , और रेलवे फोर्स के साथ शामिल कर देगी तो उसकी नौकरी भी चली जाएगी और नई झंझट शुरू हो जाएगी। अगर वह कहीं चला गया तो तृप्ति का रिश्ता भी खतरे में पड़ जाएगा। जिसका सारा दोष विवाह मन्नी – चन्नी उस पर ही डाल देंगे ! वह यह नहीं समझ रहे हैं
कि विरोधाभास में वह कुछ ज्यादा ही क्यों डरते हैं।
वैसे यह वक्ता सबसे ज्यादा डरने की है। वह फिर हो गया।
सहसा उसे अपनी उसकी डायरी की याद आई जो उसने नौकरी पर ज्वॉइन होने के समय जोड़ों के नंबर के लिए नंबर मांगा था। उसे याद आया कि नौकरी करने में समय लगता है, मन्नी ने उसे बताया था कि आगरा में उसका एक दोस्त है - डी जनरल
लाल दुकान। अगर विक्कू को चलती गाड़ी में कभी कोई दिक्कत हो तो वह डी-शेयर बाजार में लाल फोन रखता है।
याद कर के पल भर में उसे राहत मिली। उसने अपना नंबर भी शेयर कर लिया।
' नमस्ते सेठ जी! “ वह बहुत आदर से बात करती है। ”
डी डबल्यू लाल ने कहा , ' नमस्ते! कौन बोल रहे हो ?'
' सर मैं मन्नी सेठ का नौकर बोल रहा हूँ। फाइव डाउनलोड लेकर जा रहा हूं। एक बार मन्नी सेठ ने कहा था कि किसी भी तरह की समस्या हो तो मैं आपसे बात करता हूं! आज गाड़ी में कुछ कम्बल कम पढ़ गए हैं। '
' यह मैं क्या कहूँगा ?'
' रिक्वेस्ट , कि सत्तर कंबल अगर आप मुझे एरिया स्टेशन पर डेल दे चुके थे तो मैं खाना बेच देता हूं। '
' फ़ॉफ़ की बात कहाँ से क्यों गई ?' ठहाका द्वंद्वयुद्ध सेठ
बोले थे।
' अरे साहब , सवारियाँ मिलकर मुझे पीटेगी। आज सौ तीन सत्तर सवारी लेकर चल रहा हूं और मेरे पास केवल सौ तीन कंबल हैं। '
' क्या पूरा कंबेल क्यों नहीं आया ?'
' मैं नहीं जानता सेठ जी। मैंने कहा था तो चन्नी सेठ ने कहा , अभी कम्बल नहीं है ,
इतने ही कम्बल लेकर जाओ। अब गर्मी का कोई मोल नहीं है कि हम लोगों को कोई फायदा न हो। '
' ऐसा करो एसी मेंटेनर से एसी का टेंपरेचर
बढ़वा लो। '
' मेंटेनर नहीं है सेठ जी। '
' बाप रे ! तो फिर क्या करोगे ?'
' जाएगा क्या सेठ जी मैं तो यही कल्पना कर रहा हूं कि राइडर्स कंप्लेंट से मिलकर मुझे पीटगी और ये प्लांट अगर किन्हीं सरकारी अधिकारी या मिनिस्टर साहब के एक्सएक्स हैंडल पर री ट्वीट कर दी तो बदनामी, प्रतिभागी तक क्रांतिकारी रेलवे के ऑफिसर और जवान भी मेरी छात्रा से
खबर ले गए। '
' क्या यार तुम किस नंबर के कोच हो ?'
' मैं बी - तू मैं हूं। '
' देखो भाई मैं गुमनाम नहीं हूं और अगर कंबल की बात है तो किसी सेठ से दोस्ती करने की बात करनी चाहिए। उन्होंने कुछ नहीं कहा , मैं किसी हेल्प से शादी नहीं कर सकता ?'
लगभग रोता था विक्कू बोला , ' प्लीज सेठ जी बचा लो मुझे।' '
' क्यों क्या हो रहा है ? सेठ का ठेका ही तो छूटेगा! '
' आज मेरी दोनों तरफ मरना है
, धमकी दी गई तो सेठ मुझे नहीं छोड़ेंगे और अगर कंबल नहीं दिया तो सवारियां नहीं छोड़ेंगे। मैं तो बुरी तरह से घिर गया हूँ। आपका सफाई कर्मचारी भी नहीं है। एससीआई का मेंटेनर भी नहीं है और कम्बल बहुत कम है। ' लगभग रो दी के अंदाज़ में भी को बोला गया था तो प्लास्टिक करते हुए डी. जेसन सेठ ने कहा , ' चलो मैं कुछ करता हूं। '
एक में डूबते हुए आदमी को बेवकूफ़ की तरह इस वाक्य ने विक्कू को लगभग बर्बाद कर दिया था। अब उसके भविष्य के लिए केवल बीस
किमी की यात्रा थी और उसके आज के प्रतिद्वंद्वी के लिए कुछ मिनट बाकी थे।
आज गाड़ी तीन घंटे लेट थी , तो रात बारह बजे नई दिल्ली टिप थीम कायदे से दो घंटे में साफ-सफाई और मेंटेनेंस चेक होने के बाद यही रैक वापस लौटना था। लेकिन आज रैक को
यार्ड में एक ही प्लेट फॉर्म पर रोक नहीं लगाई गई है और दरवाजे नीचे दिए गए हैं। सवारियां गांधी गाड़ी में ही चढ़ी हुई हैं। उसे तो अच्छा लगा कि विक्कू ने दिल्ली से काफी पहले फ़्रेश स्टेशन के बाद ही अपने अज़ाब के साथ सामान बनाना शुरू कर दिया था और तह लगा ली।
अगर उसे पता चले कि आज वो कंबल में काम करने के लिए मीटिंग करने वाले हैं तो वह अप ट्रेन के जो कपड़े जमा करना चाहती थी, वे उन्हें जंजीर और उलटी से एक साथ बुलाते थे न जमा करते थे। हालाँकि उनके हाथ में टॉयलेटरीज़ वाॅलाज़ रोक
भी नहीं है। नौकरी के नियमों में यह बताया गया है कि जब गाड़ी टर्मिनेट हो जाए तो वह अपने बेडरोल की सारी गन्दी सामान को जिन के साथ रख ले और जब गाड़ी छोड़ दे तो उसके आधे घंटे पहले यात्रा से पूरा नया सामान ढुला गया था ।
अचानक अचानक फोन आया तो उसे लगा कि डॉक्टर उसे अपनी पीड़ा बता रहा है।
बेबस बुद्धि अमात्ता क्या मदद करेगी ? सहसा उसने नौकरों से मदद मांगी तो नहीं , एक नौकरानी से लेकर नौकर तक। वह अपने मित्र से कहेगी कि मुझे बचा ले!
लेकिन अम्मा ने ही तो ये मुसीबत डाली है.
ऐसे में उसे हमेशा यही लगता है कि उसे यह नौकरी कैसे मिलेगी ? अपने शहर में अच्छी नौकरी नौकरी कर रही थी।
वह अच्छा सर्टिफिकेट अपने शहर के अजंता होटल में वेटर का कर रहा था और अपने बी.ए. तक की पढ़ाई में छोटी-मोटी अंग्रेजी सीखी और प्रैक्टिस के कारण लोकप्रिय वेटर था , हर सर्टिफिकेटर ने उसे कुछ ना कुछ ही स्वीकृति दी थी । अगली बार सवारियों पर सबसे पहले विक्कू को ही पूछाती थी। उसे लगा कि वह एक बड़ा पात्र है और उसे लगा कि वह इस तरह का काम सीखकर किसी होटल में मैनेजर भी बन सकता है।
एक दिन एम्स को ऑल-आकस्मिक पता चला कि रेलवे में बेड रॉल स्टाम्प करने वाले आसा मन्नी-चन्नी एंड कंपनी के यहां कुछ एडमियों की जरूरत है और अगर होटल में काम वेटर हो तो वह टैंक ही उठा लेगा। विक्कू तो खोज के मन्नी सेठ से मिला। मन्नी सेठ ने बताया
' हां मुझे ट्रेंड वेटर की जरूरत है। कहां काम किया है ?'
' अजंता होटल में।' '
अजंता होटल की बात सुनकर मन्नी सेठ ने सीधे अजंता होटल को फोन लगाया था- ' हां भाई सोनी सेठ , यहां कोई विक्कू वेटर नहीं है ?'
' हां है न क्यों हुआ उसने कोई गलती कर दी ?'
' गलत नहीं की।' पूछ रहा था कि वह कैसा आदमी है ?''
' गलत नहीं की , कैसा आदमी है ? ऐसा क्यों पूछ रहे हो ?'
' मैं यूं ही पूछ रहा हूं। वहां मेरे रिलेटिव आपके होटल में गए थे तो वे अपनी सर्विस की बड़ी सराहना कर रहे थे। '
' हां हमारा यहां नंबर वन वेटर है! '
' क्या तन्खा देते हो तुम उसे ?'
' बस छह हजार प्याज़ महीना। '
' अच्छा ठीक है , बात करता हूँ । ' पिंटू ने फोन कट किया था और विक्कू से बोले थे , ' प्रियजन सेठ भी स्मारक बना रहे हैं।' चलो नोकरी नौकरी। मैं दूसरे वेटर को दस हज़ार देता हूँ , बारह सितारा हज़ार की हिस्सेदारी। सौ रुपये रोज़ खाना-ख़ुराक के! '
' अरे!सच में नौकरी पक्की ?' राहुल तन्खा का प्रस्ताव विक्कू को लालच में डाल दिया गया था , उन्होंने उतावली में कहा , ' आप तो ये समझेंगे कि मेरी कर्तव्य क्या होगी ?'
' करो यही होगा कि गाड़ी जब ओरिजन स्टेशन से चले तो ट्रेन की सवारियों को कंबल और चादर का बेड राउल बांध देना है , तकिया लगा देना है। यात्रियों की भरपूर सेवा करना है , पूरी तरह से तीर्थयात्रियों की सेवा करना है। आखिरी में जब गाड़ी टर्मिनेट होने लगी यानी डेस्टिनेशन के पॉइंट पर लगे , तो सारे चार्ट , कंबेल शीट वापस इकट्ठा करो फिर से आने की ताह बना कर थैलियों में भर दो। टर्मिनेट होता ही गाड़ी के सामान को सारा सामान सोंप के उदाहरण दो , तो छुट्टी का विवाह ,
फिर आराम से अपने घर जाओ। '
' तो इसमें मुझे कोई दिक्कत नहीं है , होटल में भी यही सब तो करते थे। ' '
' बस समस्या एक ही है कि नींद पूरी नहीं हो सकती। '
' क्यों ?'
' अरे भाई , रात और दिन की स्ट्रेन नहीं , तो हर स्ट्रेन से आशिकों वाली सवारियों को बुरा रोल तो देना ही छोड़ो। सो हर पल जागता रहा सा प्यार तुम। '
' ऐसे जागते रहेंगे तो बीमार नहीं होंगे हम ?'
' दस-पांच दिन में आदत पड़ जाएगी , तो नींद पूरी हो जाएगी। '
' सोने के लिए बर्थ गेट क्या ?'
' सवारियाँ नहीं हैं तो हर खाली बर्थ पवित्र है। ट्रेन भरी हुई चल रही है तो बैड राउल के बार्ड राउब यानि क्लास के आगे लगी हुई बर्थ हीफ के लिए रिजर्व है। '
एक मिनट रुक कर बोले थे मन्नी सेठ ' सरकार ने फिर से रेल कर्मचारियों को हटाया , रेलवे कर्मचारियों
को
नौकरी से हटाया यानी एयर कंडीशनर का टेंपरेचर मेंटेन करने वाला अलग-अलग होता है , लेकिन उसके पास सबसे अहम खतरा है , नींद का खतरा! हां अपन ने नींद की रोशनी पर भरोसा किया का समर्थन किया है। सारे साज़िशों के स्टाफ़ के पास ही ज्ञान बैठागा ,
तुम हर हाल में रहोगे। '
' ठीक है सेठ जी मैं आज ही मठ लेकर जाता हूं। '
' अरे तुम अजंता होटल वाले पुराने सेठ से नौकरी छूटने की बात करो न! '
' बात करना क्या सेठ जी ? कोई गुलाम तो नहीं उनका ? काम करने का सौदा उनका है , खुद को नहीं दिखता उनका। मैं आपसे मना कर रहा हूँ। बच्चे मुझे इतनी सी तन्खा में नौकरी नौकरी नहीं पूसा रही।
मन्नी सेठ के पास से पुराने सेठ के यहां समय वह मन-ही-मन हिसाब लगा रहा था कि अभी
छह हजार तन्खा और अनुपूरक-इकराम का संयोजन उन्हें मुश्किल से आठ हजार ही तो मिला है , यहां सीधे बारह मिलने वाले हैं , घूमना फिरना अलग! '
उसने सोचा ' मां जब शादीशुदा होगी कि उसे बारह नौकरी मिलेगी तो उसकी शादी-ब्याह की बात होगी। हां उनकी उम्र अब ग्रेजुएशन साल की हो गई है , शादी ब्याह भी होना चाहिए। यूँ तो उसके समाज में पेंड्राह - सेल साल तक के वैज्ञानिकों की शादी हो जाती है , विक्कू यानी विकास ही है जो साल तक के होने तक रहता है। अब उनकी शादी भी होगी। दो महीने पहले मां पूछ रही थी कि किसी लड़की पर नजर हो तो बात चल रही है , हम जात - पंती बिना तेरी शादी कर देंगे।
उसे हंसने लगा ' मां हम कौन सा दिखते हैं ? कौन-कौन जाति के पाखंड वाले लोग हैं कि हम जाति-पांति की बात करते हैं। मुझको तो वहां मौजूद लोग , जो लड़की आपको समझ में आ गई वहां कर दो। '
मां बोली थी ' लेकिन छह हजार में तू कैसे गुजरेगा ? '
उसने कहा ,
' ठीक है भगवान, तो मुझे बड़ी नौकरी मिल जाएगी।' '
उसके जापान में ऑनलाइन सुरसती सुधामती हो गई , उसे बड़ी नौकरी मिल गई। अब वह ठीक से नौकरी चाहती है , जिससे शादी - ब्याह हो जाएगा।
उसने कुछ दिनों तक सेठ के बताए सपने को ठीक कर लिया था। ऐसा वाला मेंटेनर उसी के पास के व्यापारी थे। वॉशिंग मशीन वाले भी प्लास्टिसिटी थे और उनके व्यवहार की सराहना करते थे। पता चला कि सफाई वाले दोनों आदमी जाति से पंडित हैं तो वह चौंका था-पंडित हो के सफाई कर्मचारी!
होटल के अनुभव के अनुसार वह सभी सवारियों से ' नमस्ते बाबूजी ' और ' थैंक यू ' ' वेलकम ' जैसे शब्द का प्रयोग करता था।
लेकिन धीरे-धीरे इस नौकरी की कमियां , अपनी गलतियां और खामियां सामने आने लगीं। उसकी नींद कभी पूरी नहीं होती थी , और खाने का भी कोई समय नहीं होता था , ज्यादातर तो रेलवे बेंडर के अंतिम समोसा और बेडर पकोड़ा खाके का काम था। फिर भी कई सवारियों ने बिना बात ही उनसे झगड़ा कर लिया था , तू तड़ाक करके बोल तो जैसे हर यात्री का अधिकार था। ऐसा हुआ था कि शैतान के ठीक सामने ही वह अपना बर्थ शेयर लेटा था तो आई-डुकेली महिलाओं का मालिक समय पर रुका हुआ था। अक्सर दो महिलाएं साथ आती थीं , एक महिला बाहरी हिस्से में रहती थी और कई बार पुरुष उनके साथ पार्टनरवाला तक बनके आते थे। गलती से अगर विक्कू की नजर शैतान के दरवाजे पर हुई महिला पर पड़ जाए तो उसका दोस्त पुरुष डांटता था , ' क्यों जा रहा है ?'
वह बार-बार करवट मठ अपनी बर्थ पर लेता रहता था।
कभी-कभी कुछ मीठा और सुहाने अनुभव भी होता था। कई बार जब वह लाता था और कुछ लड़कियां उससे कहती थी , ' सुनो बेड-रॉल वाले भैया , तुम थोड़ा सा उठ के बैठ जाओ न!' हमको यहां पर सीताफल स्थापित है। '
उन्होंने चौंका दिया था-लड़कियां और स्टार्स!
हां कई लड़कियों ने अपने बर्थ पर बैठकर सीता पी ली है। ऐसे वक्त विक्कू दूसरी तरफ माउथ रेस्ट हाउस रहता है। यही नहीं , कई लड़कियों ने तो बियर भी पी है। हां अब महिलाओं में बियर और सिगरेट का वोग तेजी से बढ़ रहा है। यह लड़की अगर भव्यता के साथ अपनी बर्थ पर शराब या सिगरेट पीती तो आस-पास की सवारियां बर्बाद कर सकती थी। लेकिन विक्कू के पास ऐसी कोई रोक नहीं है , वह न तो रेलवे का मुलाजिम है और न ही पुलिस का अधिकारी है। वह तो गाड़ी भी नहीं है कि किसी को टोकने का हक हो। सवारी तो आज़ाद होती है। रेलवे के कर्मचारियों को नौकरी मिल सकती है , रेलवे के कर्मचारियों को नौकरी मिल सकती है , कम्प्लायंट कर सकते हैं। वह तो सीधे मंत्री और प्रधान मंत्री को भी एक्स
और ट्विटर पर शिकायत कर सकते हैं। लेकिन विक्कू क्या है ? वह तो एक तुष्ट सा व्यक्ति है ,
उसकी कोई सवारी नहीं है और कोई कर्मचारी नहीं है।
ऐसी कई शराब और सिगरेट पीती लड़कियों को वह भूखा रखती है। सुंदरता और बिंदास प्रतिभा से भरी यह लड़कियाँ उसे पहले अद्भुत रूप देती थीं ,
अब कुछ दिनों से जब उसे आदत हो गई है। वे उसे मोहक लगते हैं।
उसने अपने आप को संयमित किया। लेकिन अनजाने में प्रयास है कि पीठ से छू ले , सुविधाजनक सता दे। वे लड़कियां भी इस बात पर ध्यान न दें कि यह अटेंडेंट की पीठ उन्हें छू रही है , या जाने अनजाने में हाथ भी उन्हें छू रही है। विक्कू इसी तरह खुश है , क्योंकि उसे पता है कि गेंद और रेत भी इसी तरह सिर्फ संघ कर ही अपनी संतुष्टि कर पाती है।
सहसा ने उसे गुस्सा दिलाते हुए अपनी सोच पर कहा , ' वह किस जानवर की बात करता है जो जानवर के लिए जाने वाले सुख की तरह खुद के सुख की कर रहा है। उसने अपने मन को झटका दिया , ' अरे! ' बर्थ पर अकेला ही तो लेता है , न बीयर्स पीती लड़कियां हैं , न उनकी सिगरेट की गंध है।
वह खुद पर मुस्कुराया था। संयोग से एक महिला नौकर में से निकल रही थी। विक्कू को समीक्षा करते हुए दिखाया गया कि वह महिला मित्र बन गई। एक साल पहले वह
महिला थी , जो माताजी की इच्छा थी। बहुत मोटी , थुलथुल बदाम , चर्बी से लटकते गॉल और चरबी के बुलबुल की कम्मर थी उस अमीर की , लेकिन स्त्रियों को तो हर उम्र में एलर्ट रहना सिखाया जाता है न। '
विक्कू ने उधर से नजर डाली विंडो की तरफ लगा दी।
गाड़ी तेज गति से भाग रही थी , बस आठ या दस किमी एरिया बचा होगा। पहले राजा की मंडी स्टेशन आओ , फिर आगरा कैंट। भगवान करे सेठ दो बैलून लाल की जुगाड़ व्यवस्था काम
कर जाए ,
उसे कंबल मिल जाए।
ट्रेन भागती जा रही थी और उसकी नज़र बढ़ रही थी।
इधर पांच यात्रियों ने उसके पास फिर से कहा , ' क्यों लड़के , हमारा कंबल कहां है ?'
' किस कोच के , किस नंबर के बर्थ के बाबूजी ?'
' इसी बी 2 में 64 से लेकर 72 तक के कंबल! '
' बाबूजी मेरे कम्बल की दूसरी गाड़ी में रख दिए गए थे , अब आगरा में मुझे कम्बल
मिलाने वाले हैं। मैं अभी आपको देता हूं। आपका बर्थ का नंबर नोट कर देता हूँ। '
उन्होंने डायरी और नोट 'बी 2 में 64 से 72 नंबर तक की सवारी को कंबल देना है। '
सवारियों को बहुत ही गंभीर लड़का लगता है। गंभीर अटेंडेंट है , जो यात्रियों की मांग को नोट कर रहा है।
गोरा सा लंबा नाक वाला मुसाफिर बोला ' ये जो साधक में पानी भर रहा है ठीक क्यों नहीं कर रहे ?'
वह फिर से चित्र से चित्रांकन करता है ' बाबूजी , मैं सफाई वाला नहीं हूं। फिर भी मैंने फ्लैश बंद करने की कोशिश की थी , लेकिन नहीं हुई और इसका कंप्लेंट शायद किसी यात्री ने नहीं देखा होगा। देखो आगरा आ रहा है शायद कोई भी कर्मचारी इसे ठीक नहीं मानता।
' हमें यह बात समझ नहीं आई कि बाथ रूम के बाहर यह पानी क्यों फेल हो रहा है ?
लेट्रिन सीट के नीचे लगे हुए तख्तों वाले पाइपों से नीचे नहीं गिर रहा है ?'
' बबुजी में आधुनिक प्रकार के शौचालय लगे हुए हैं न , इनके नीचे से शौचालय का बक्सा कसा जाता है , चित्र से पानी छन-छन के नीचे गिरता है। बाकी सॉलिड मटेरियल में भारती रहती है , पूरी यात्रा तक एक ही तिहाई से काम चल जाता है। आज तो ऐसा लगता है कि किसी ने लेट्रिन सीट में कोई कपड़ा या रद्दी या बेकार सामान डाल दिया होगा तो पानी रुक रहा है , नहीं तो आसानी से पानी बहता रहता है ,
जैसा कि रेस्ट के बाथ रूम में बह रहा है। '
उस यात्री ने मुंह फोड़ते हुए कहा , ' तुम्हें उसके बॉक्स का डिसेक्शन क्यों लगा ? ये कब पूछा था ? बड़ा गन्दा है तू ! '
वह लागत्या. लेकिन सामने वाला मुस्कान के मूड में नहीं था। उसने बड़ा घिना सा चेहरा बना लिया था और वहां से निकल लिया था , जैसे विक्कू न तो शौचालय के बक्से में भरा हुआ था वह गंदा सामान हो।
विक्कू
को हंसी आई। उसे मजा आया , ' चलो कम से कम इन मोटे-ताजे और फिर - अघाए लोगों के मन में। एक विकृति तो पैदा हुई।
सहसा ने अपने आत्मबल को बढ़ाते हुए कहा , ' हां इन लोगों ने क्या मतलब रखा है ? कर्मचारियों को क्या समझ में आता है ? हम लोगों ने क्या समझा ? तुम राहुल बेडल सुपरस्टार के लाइफापे और चाय के डिस्पोजेबिल मैग तक एग्रीमेंट पर जमा करते हो , अमीर के पास लगे कचरादान में क्रांति की जहमत नहीं करते! क्योंकि
हमारी ही स्थापना है कि हम गंदगी साफ करें!
और हमारा ही समर्थन है कि आपकी
हर उल्टी-सीधी क्रियाशीलता को बनाए रखें ?
दीनू सही कह रहा है कि हो सकता है ए.सी. के टेंपरेचर को मेंटेन करने वाले की आज पत्नी बीमार हो ,
हो सकता है सफाई करने वाले का बच्चा बीमार हो! कम्पार्टमेंट के
सारे सामान तो ठीक चल रहे हैं , एक न चला , तो भी काम तो बेकार न!
उसे लगा कि यह सारा स्टाफ अलग नहीं है , बल्कि भाई जैसे हैं , उसके दोस्त हैं। किसे पता चला कि किस पारिवारिक परेशानी में फंस गए हैं। चलो मैं ही हेल्प करता हूँ।
वह बर्थ पर बैठ कर ए.सी. का बॉक्स उसे याद दिलाता है कि कौन सी घुंडी घूम रही है ए.सी. टेम्प्रेचर कम होता है। एक ट्रेंड ऐ.सी. मेंटेनर की तरह वह घुंडी
कुचाई और ए.सी. का टेम्प्रेचर जो चौथाई परटेन था , धीरे-धीरे से चौबीस
पर कर दिया।
बड़े आहिस्ता से वह ऐ.सी. बॉक्स की खिड़की बंद की। हुक का लॉक और अन्य डिब्बों की ओर से चलाया गया। अब उसे एक-एक करके सारे डिब्बों के ऎ.सी. के टेंपरेचर ठीक कर देना था ताकि आगरा में कंबल न भी मिल पाए तो कंपार्टमेंट में इतनी गर्मी हो जाए कि लोग ना कंबल मांगे।
हो सकता है तो वह सामने वाले को भी किसी न किसी तरह से ठीक कर देगा , ताकि गैलरी में पानी न मिले।
वह नहीं चाहतीं कि उनके वर्ग के किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्रवाई हो।
अब उनके अंदर दीन-एकांत का भाव समाप्त हो रहा है , एक अनोखा व्यक्तित्व जिसमें भारत शामिल है ।
अब आगरा 4 किमी ही बचेगा , राजा की मंडी पर गाड़ी रुक रही थी। आगरा कैंट स्टेशन आते-आते वह अपने पांचों डिब्बों ए.सी. के टेम्परेचर को ठीक कर चुकाया गया था , यानी गर्मी को बढ़ाया गया था। जब बी टू की तरफ आया तो उसे अनुभव हुआ कि कंबल ओढ़ कर लेते लोग कंबल देखकर लगे हैं। थे कम्बल प्रिंसेस वाले बी 2 के 64 से 72 वाले लोगों में से एक ने कहा ' सुन भाई ऐ.सी. 'मेंटेन करने वाला कहां है ?'
' पता नहीं बाबूजी , शायद आगरा में। '
' तो यार ऎ.सी. का टेंपरेचर काम करवा दो। '
उसने देखा कि बीच में ही उसका दोस्त पैसठ
नंबर का यात्री बोला था कि काहे को टेंपरेचर काम करवा रहे हो ? अच्छा है कम्बल नहीं माँगना ,
हम चादर लपेटकर लेटते हैं! '
विक्कू को
लगा कि वह अपने सभी दुश्मनों को नहीं जानता , कुछ लोगों को जानता है।
उसने नमस्ते करते हुए अपनी सीट की तरफ बढ़ोतरी की।
गाड़ी राजा की मंडी से आगरा की तरफ तेजी से बढ़ रही थी। वही तेजी से वापस आ रहा था विक्कू का स्टाफ। अब कंबल मिले न मिले , इतनी परेशानी नहीं होगी , सावधानी के नाते फिर भी वह तंग कर्णेरों से बच निकले, कम से कम रात के बारह घंटे अपनी बर्थ पर नहीं रहेंगे।
वैसे भी ' कंबल की जरूरत ही क्या है ? इतनी गर्मी तो हो रही है कंपार्टमेंट में। ' जैसे वाक्य बोलकर यात्रियों को बहलाने की कोशिश की जा सकती है।
यह भी हो सकता है कि कुछ लोग अब तक एकजुट न हों , अपने सिरहाने रख लें। उन्होंने अपने कंबल की मांग कर उन लोगों के मुंह पर वार किया, जिनमें चौबीस डिग्री टेम्परेचर में भी कंबल की जरूरत होती है।
अब विक्कू को कोई डर नहीं लग रहा था , उसके अंदर का डर कम हो रहा था।
ज्यों ही यह डर कम लगा तो लगा कि उसे भूख लग रही है। आज वापसी में गाड़ी तीन घंटे लेट थी ,
रात बारह बजे उतरकर अपने दोस्त के पास चली गई , वहीं नहा-धोकर खाना खाया और फिर दो बजे के लिए अपनी कंपार्टमेंट में सवार हो गई। आज गाड़ी तीन बजे से चार
बजे तक चल पड़ी। न उसे संस्थान का समय मिला , न भोजन का। उसे अब भूख लग रही थी।
शाम के छह बज रहे थे , शाम के खाने का भी वक्त हो गया था।
उसे तो अब
दो काम करना है , कंबल मिल जाएगा तो कंबल भी लेना है...और...और वह किसी बेंडर
खाना भी लेना चाहता है!
ट्रेन के आगरा स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर लगते विक्कू एक आम सवारी की तरह का सामान भरा हुआ था, ट्रेन के दरवाजे पर गगनचुंबी इमारत खड़ी हो गई।
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