गुरुवार, 7 अप्रैल 2011

कृष्ण बिहारी लाल पांडे जी का गीत





कृ’ण विहारी लाल पांडेय सर का गीत-
अपना समय लिखा....

जब जब खुद को लिखने बैठे
अपना समय लिखा।
अच्छा नहीं लिखा लेकिन
जो सच था अभय लिखा।।

बड़े बड़े प्रस्थान चले पर थोड़ी दूर चले।
चलते रहे विमरस मगर निसकरस नही निकले।
हम क्या अभी आधुनिक होंगे सोच विचारों में
बन्द किताबों से बाहर हम निकलें तो पहले।
ऐसे लोग सभी समयों में होते आये हैं
जिनने घने तिमिर को भी सूरज का उदय लिखा। जब जब खुद को....
आधा वतZमान खोया है त्रासद यादों म।ें
संवादों के बदले खबरें मिली विवादों में।
सिफZ मंच पर नहीं हर जगह अभिनय ही अभिनय
जाने कितना कपट छिपा है नेक इरादों में।
फिर भी कुछ संवेदन बाकी हैं अब भी जिनसे
हर आँसू की परिभा’ाा में हमने हृदय लिखा । जब जब खुद को....
विज्ञापन में बसने वालों का क्या कहना है।
भूखी आत्माओं को सब ऐसे ही सहना है।।
कबिरा तुम तो लिये लुकाठी निकल पड़े घर से
हमको तो बाजारों मेें आजीवन रहना है।
जीवित तो रहना था जैसे भी होता आखिर
इसीलिए अपनी पराजयों को भी विजय लिखा।
जब जब खुद को लिखने बैठे
अपना समय लिखा।
अच्छा नहीं लिखा लेकिन
जो सच था अभय लिखा।।
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डाW0 कृ’ण विहारी लाल पांडेय
उम्र
लगभग चौहत्तर साल
प्रका”ान
दो कविता संग्रह
सम्प्रति
स्नातकोत्तर महाविद्यालय से प्राध्यापक से सेवा निवृत्ति बाद स्वतंत्र लेखन
सम्पकZ
70, हाथीखाना दतिया मध्यप्रदे”ा 475661
09425113172

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